"हिन्दुस्तानी संस्कृति एवम धर्म "
(एक द्रष्टिकोण )
धर्म का मतलब हिन्दू या मुस्लिम नहीं है | दुनिया में हम मानवो के लिए सिर्फ एक ही धर्म है उसका नाम है "मानव धर्म " | हिन्दू-मुस्लिम-इसाई आदि, ये सब तो सम्प्रदाय है, संस्कृतियां है, धर्म नहीं है | जैन, सिक्ख, शिया, सुन्नी, केथोलिक ...आदि इन मुख्य सम्प्रदायों के उप- संप्रदाय (शाखाए) है |मंदिर, मस्जित, चर्च,ये अलग-अलग सम्प्रदायों के उपासना स्थल है | धर्म सदैव व्यक्तिगत होता है तथा हर संप्रदाय के लोगो में व्यक्तिगत या सामूहिक स्तर पर विद्यमान होता है | अहिंसा, सत्य, मानवता, गैर-आतंकवाद, नेक-नियति, सदाचार, सचरित्रता, समता, सु-कर्म, कर्त्तव्य पालन, परोपकार, सेवा, जीव-दया, सहिष्णुता, विनम्रता, आदि.... गुण "मानव धर्म " के होते है इसके विपरीत, हिंसा, असत्य, आतंकवाद, दुराचार, छल-कपट,............आदि ये सब अधर्मी गुण है |
जैसा कि मैंने कहा धर्म सदा व्यक्तिगत या सामूहिक होता है पर किसी संप्रदाय के सभी लोग धार्मिक या अधार्मिक नहीं होते | कोई भी व्यक्ति, या समूह भी पूर्ण-रूपेण, धार्मिक या अधार्मिक नहीं हो सकता|
ये हमारा सौभाग्य है कि धर्म और संस्कृति का उदय सर्व प्रथम, हमारे हिन्दुस्तान में हुआ| मोहन जोदड़ो की "सिन्धु-संस्कृति" सबसे प्राचीन है| "सिन्धु" शब्द, अपभ्रंश होकर "हिन्दू" हो गया, अतः "सिन्धु-संस्कृति", "हिन्दू-संस्कृति" उच्चारित होने लगी| अतः हिन्दू संप्रदाय में सर्वाधिक धार्मिक लोग है| यहाँ पर हिन्दू समुदाय से आशय उन सभी लोगो से है है जो मूल रूप से हिन्दू संस्कृति में जन्मे और पले बढे| बाद में किसी अन्य सम्प्रदाय के विदेशी लोगों ने बल पूर्वक या लालच देकर अधार्मिक तरीके से उनको हिन्दू संप्रदाय से अलग करके अन्य संप्रदाय में शामिल किया फिर भी उन सबकी संस्कृति तो हिन्दू ही है | अतः गर्व के साथ हम कह सकते ही कि हिन्दू संस्कृति में पालित पोषित लोग (हिन्दू, मुस्लिम, इसाई,) दुनिया में सबसे ज्यादा धार्मिक है|
यही कारण है कि राजकीय स्तर पर हमारे देश कि सरकार में कभी भी अधार्मिक नीतिया नहीं रही | अर्थात, हमारे देश कि सरकारी नीतिओ में कभी भी आतंकवाद, हिंसा, पैसे की लालच देकर संप्रदाय परिवर्तन कराना ,जैसी अनेतिक बाते नहीं होती है| जबकि चीन, पाकिस्तान, अमेरिका, यूरोप जैसे कई देशो कि राजकीय नीतिओ में इन अधर्मी गुणों का समावेश होता है| अमेरिका, यूरोप के देशों कि नीति तो खुले रूप में ही पैसा देकर लोगो को इसाई बनाने की है, तथा चीन, अमेरिका एवं कई देश तो छुप कर आतंकी देश पकिस्तान एवं कई अन्य आतंकी देशों की मदद करते है| यदि हम प्रतिशत के मान से देखें, तो दुनिया के सभी मुसलमान और इसाइयों में सबसे ज्याद धार्मिक लोगो का प्रतिशत "हिन्दू-संस्कृति" के मुसलमान और इसाई लोगो का है| बाकी देशो के लोगो में धार्मिक लोगो का प्रतिशत बहुत कम है|
धर्म शास्वत एवं अजर अमर होता है| अधर्म का सर्वदा नाश ही होता है| यही कारण है की "हिन्दू-संस्कृति" में धर्म के समावेश के कारण ही आज तक हमारे हिन्दुस्तान को इतनी बार विदेशीयो द्वारा आक्रमण करके लुटने के बाद भी कोई मिटा नहीं सका | वे सब अधर्मी मर खप गए उनका सर्वनाश हो गया पर "हमारा हिन्दुस्तान " सदा सलामत रहा है और रहेगा ...और पुनः सुपर पावर बनेगा |
अतः गर्व से कहो की हम हिन्दू है ..... ( फिर कहता हू भारतीय मूल के सभी हिन्दू-मुस्लिम-इसाई... सब हिन्दू है.. मतलब "हिन्दू-संस्कृति" के है| दुनिया में केवल "हिन्दू-संस्कृति" ही है जिसमे अधार्मिक गुण नहीं है, दुनिया के कई अन्य संप्रदाय मूलतः अधार्मिक ही है|
आपकी प्रतिक्रिया से कुछ सार्थकता होगी |
धन्यवाद ,
लखमी चंद तोलानी
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