Sunday, 21 August 2011

मनमोहन सिंह एवं ठाकुर... एक तुलना.......


इसमें दोष नहीं मन मोहन का,,,
दोष है दूषित प्रणाली का...

हां हम सब सहमत है की आदरणीय मनमोहन सिंह जी एक इमानदार,कुशल अर्थशास्त्री एवं बेहतर प्रशासक एवं नेता है| प्रधामंत्री के पद के लिए अति-उपयुक्त भी है| हमें ऐसे लोगो की सरकार में सख्त जरुरत भी है|

पर,,

फिर भी उनकी सरकार अब तक की सबसे भ्रष्ट सरकार क्यों???

हम सब को पता है की वे मात्र कठपुतली पी.एम्. है,उनके हाथ बंधे नहीं है बल्कि कटे हुए है,
वे चाहकर भी कुछ नहीं कर सकते,अपनी व्यथा वे इमानदारी से कई बार व्यक्त भी कर चुके है, गठ-बंधन की मज़बूरी भी बता चुके है|

इसमें दोष उनका नहीं, हमारी चुनाव प्रणाली का है,,,

आज अगर वे जनता द्वारा सीधे प्रधान मंत्री चुने गए होते तो, अपनी मर्जी से चुनकर सभी दलों से अच्छे लोगो को मंत्री  बनाते, अगर कोई गलती करता तो उसको बदल देते, देश के विकास और जनता के कल्याण के लिए साहसिक फैसले लेते| 


भ्रष्टाचार एक मानवीय अवगुण  है, जहा भी मानव है वहा ये रहेगा, पूरी तरह से तो ख़त्म कभी हो नहीं सकता पर,,, दुनिया के कई देशो की तरह ८०-९०% नियंत्रित तो किया ही जा सकता है, बाकी १०-२०% आटे में नमक की तरह रहता तो इतना नुक्सान देश और जनता का न होता| पर आज तो नमक में आटा है यानी ८०-९०% भ्रष्टाचार हो गया है|

अब एक अहम् बात....

ठाकुर के हाथ भी कटे हुए थे... पर उसने बहादुरी से, बहादुर लोगो की मदद से लड़ाई लड़ी,और गब्बर को ख़त्म किया...
मनमोहन जी भी ये बहादुरी क्यों नहीं दिखाते....
क्यों,क्यों,क्यों?????
अगर वे बहादुर नहीं है तो कुर्सी क्यों नहीं छोड़ देते???

अब भी कुछ नहीं बिगड़ा है....श्री मनमोहन जी, देश की खातिर शहीद हो जाइए... कुछ कर दिखाइए...
आपकी छवि तो इमानदारी की है ही, आप इतिहास में देश के शहीदों की सूचि में भी अंकित हो जायोगे...

कुछ करिए.....
या तो...हिम्मत दिखाइए ...
या फिर...
कुर्सी छोड़ दीजिये....

विनम्र निवेदक,
लख्मीचंद तोलानी...

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